Where the Mind is without Fear

 


दोस्तो मै सुधीर आप सब का मे स्वागत करता हु I

दोस्तो आज हम एक अद्भुत, लोकप्रिय, सकरतमक, वास्तवतविक दृष्टीकोण को बढावा देणेवाली और एक ऊर्जा निर्माण करणेवाली कविता हिन्दी भाषा मे समझनेका प्रयास करेंगे I

दोस्तो आज हम गुरुदेव रविंद्रनाथ टागोरजी की लिखित Where the Mind is without Fear इस कविता का line by line हिन्दी मे अध्ययन करेंगे I

दोस्तो, गुरुदेव रविंद्रनाथ टागोरजी पेहले भारतीय है जिन्हे साहित्य का पहला नोबेल प्राइज मिला 1913 मे मिला I

यह नोबेल प्राइज उणके Gitanajali नामक अप्रतिम कविता संग्रह के लिये दिया गया आयI

इसका English अनुवाद उन्होणे खुद Song Offerings नाम से किया I


दोस्तो, ये गुरुदेव रविंद्रनाथ टागोरजी की 110 साल पेहले की गई एक येसी रचना है जो आज भी हिंसा, नफरत और अहंकार की चुनौती से जूझती दुनिया को इंसानियत का संदेश देती है I

गुरुदेव रविंद्रनाथ टागोरजी ने हमे राष्ट्रगान दिया.....करीब 80 साल की अपनी जीवन यात्रा के दौरान अपणे विचारोंसे और योगदान से पुरी दुनिया को लगातार समृद्ध किया. In true sense he was the Global Citizen.

 

Where the Mind is without Fear

(https://allpoetry.com/Where-The-Mind-Is-Without-Fear)

Where the mind is without fear and the head is held high

Where knowledge is free

जहा मन मे कोई भी कैसा भी भय ना हो, और हमरा

सिर हमेशा उंचा रहे.

जिस देश मे ज्ञान पुरा मुक्त हो,

·      कवी, भगवान से प्रार्थना करते है की उस दरम्यान जो ब्रिटिश लोगो का एक भय निर्माण कीय गया था. समाज मे एक प्रेशर स्ट्रक्चर निर्माण कीय गया था असकी वाजह से हर इंसान एक botheraion मे था और कोई भी फ्री नही था. इसलीये कवि कहते है की हमरे स्वतंत्र भारत मे ऐसा कूच भी ना हो और every mind should be without fear.

·      Where knowledge is free हमारा देश ऐसा हो जहा knowledge mean education फ्री हो. ये हर कैसी इंसान के लिये फ्री हो और उसमे कैसी भी सीमाये या बंधन ना हो. Educational institutes should admit students of all races and classes.

“The highest education is that which does not merely give us information but makes our life in mar money with all existence.”

 

 

Where the world has not been broken up into fragments
By narrow domestic walls

जहां संकीर्ण दीवारों में न बंटी हो दुनिया

·      पुरा विश्व एक घर जैसा होणा चाहीये. पुरे विश्व मे कैसा भी भेद नही होणा चाहीये. एक बडा विस्तारीत दृष्ठीकोण वाली दुनिया रहणी चाहीये. विविध जाती धर्म पर लोगो बटे ना हो.

 

Where words come out from the depth of truth

जहां सत्य की गहराई से निकलते हों शब्द सभी,

·      सत्य सत्य होना चाहीये और इसका हणन कभी भी ना हो. हमारे राष्ट्र का हर इंसान सत्य से जुडा होना चाहीये और किसी भी हाल मे सत्य के साथ समझोता ना करे. ऐसे सत्य को माननेवले राष्ट्र का सपना गुरुदेव टागोर इस कविता मे देखते है. (Facts are many but the truth is one)

 

Where tireless striving stretches its arms towards perfection

·      हर इंसान विना थके काम करता रहे. अपणा जो सपना है, आपणा जो राष्ट्रहित मे देणे का योगदान है उसे perfection के साथ देते रहे. किसी भी हाल मे रुकणा नही है नाकी थकणा है. किसी भी हाल मे नकारात्मक सोच से जुडणा नही है... परीपूर्णता, और सकारात्मकता ही जीवन कि सबसे बडी ताकत है जिसके साथ जिसके साथ हर अस्मभव संभव है.  

 

Where the clear stream of reason has not lost its way
Into the dreary desert sand of dead habit

 

·      हर इंसान वास्तविकता मे जिना चाहीये. हर किसी को एक लॉजिकल सोच रखकर आगे बडणा चाहीये. आपणे जीवन का संपूर्ण चित्रण हमे पता होना चाहीये जो और इस सोच मे हमारे समाज कि superstitious चिजे, बाते या सोच बाधा नही बनणी चाहीये. गुरुदेव टागोर कहते है कि मेरे राष्ट्र के हर इंसान ने ऐसे सोच के बजाय मे तर्क के आधार पर सोचणा चाहीये.

Where the mind is led forward by thee
Into ever-widening thought and action

·      हर इंसान कि सोच बडी, सकारात्मक और विशाल होणी चाहीये. गुरुदेव साक्षात भगवान से प्रार्थना करते है कि और येसी सोच बढाने के लिये औए प्रतिभा संपन्न विचार और कृती को बढावा देणे के लिये खुद भगवान को आगे आणे के लिये कहते है.


Into that heaven of freedom, my Father, let my country awake. हिन्दी

 ·      गुरुदेव कहते है कि ए सब जो qualities है ओह सिर्फ जन्नत, heaven या स्वर्ग मे ही हो सकती है जहा हर इंसान बिलकुल free है और आपणे आपणे सशक्त विचारधारा के साथ राष्ट्रहित को सामने रखकर अपणे कार्य कर रहा है. ओ आशा करते है की ये आझादी की या आझाद भारत की भावना हर हिंदुस्तानी मे निर्माण हो.

यहा my father जो है ओ almighty को refer करता है. गुरुदेव येसी कंट्री expect करते है जिसमे ये सब बाते हो.

 

जहां मन में भय न हो कोई, और ऊंचा हो भाल
जहां ज्ञान हो मुक्त,
जहां संकीर्ण दीवारों में न बंटी हो दुनिया
जहां सत्य की गहराई से निकलते हों शब्द सभी,
जहां दोषरहित सृजन की चाह में,
अनथक उठती हों सभी भुजाएं,
जहां रूढ़ियों के रेगिस्तान में खो न गई हो,
तर्क-बुद्धि-विवेक की स्वच्छ धारा
जहां लगातार खुले विचारों और कर्मों से
मिलती हो मन को सही दिशा...
ओ परमपिता, स्वतंत्रता के उसी स्वर्ग में जागे ये देश हमारा !

 

 दोस्तो, आशा करता हु आपको ये ब्लॉग पसंद आया होगा. तो दोस्तो, इसे like और शेअर किजिये I

 

तो दोस्तो, फिर मिलते है अलग अंदाज मे...अलग विषय के साथ....

 

आपका खयाल रखीये...तंदरूस्त रहिये...खुश रहिये.....

 

धन्यवाद !

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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About Video:- This video contains explanation and thematic analysis of the renowned poem composed by Gurudev Dr. Rabindranath Tagore, i.e. Where the Mind is without Fear. This video talks about in brief the contribution of Gurudev Dr. Rabindranath Tagore and detailed analysis of his poem.

The videos on other such aspects and elements will be uploaded soon.

Till then enjoy it.. TAKE CARE.... STAY SAFE.... BE HAPPY...

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Link of the previous videos: Irony & Myth – https://www.youtube.com/watch?v=BvaqjzTk1c8&t=451s

Allegory & Flat and Round Character- https://www.youtube.com/watch?v=j8GBVeUrAb0&t=10s

What is literature ? – https://www.youtube.com/watch?v=UnZi2SbgZ-o&t=40s

Lyric and Sonnet - https://www.youtube.com/watch?v=OrHPqf90bNw

 

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